क्या पिघलते तुम

कह तो देते तुम्हें हाले दिल मगर , क्या समझते तुम
कौरे पन्नों पर उकेरते जो शब्द , क्या बदलते तुम
दिल की बातें कागज़ नहीं सुनो, धड़कनो से पूछो
हालात अपने जो तुमको बताते, क्या पिघलते तुम !!
कामनी गुप्ता ***
जम्मू !

         

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