खुद को मार के ही दुनिया नसीब है

मंजिले तो बहुत भटकी हैं बहुत मेरी तलाश में
ज़िंदगी ढूंढने में खोया रहा मैं अपनी लाश में

मुर्दा बन पा भी लेता दुनिया के तख्तो-ताज
देख उसे जो जिंदा ना होता उस पल काश मैं
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Yuvraj Amit Pratap 77
.. दर्द भरी शायरी –    .कता

         

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