जाती नही दिल से याद क्या करूं

जाती नही है दिल से तेरी याद क्या करूँ।
सुनते नही खुदा मिरी फरियाद क्या करूँ।।

ऐ जिंदगी तुझसे नहीं कोई मलाल है।
जब तू ही दग़ाबाज़ तो इम्दाद क्या करूँ।

तूने तो सुनी ही नहीं है मेरी दास्ताँ,
अब दफ्न है दिल में मिरी रुदाद क्या करूं।।

         

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