जिंदा दिखने को ज़रिया बनाया लिखने को

वक्त काटने का ज़रिया बने हम ज़माने के लिए हैं
नहीं हम करते दर्द बयां शायरी हो जाने के लिए हैं

देख ले बस कभी वो आकर हाँ वो मोहब्बत ही थी
ना हो दफन तबतक अपनी लाश बचाने के लिए हैं

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… Yuvraj Amit Pratap 77
..  दर्द भरी शायरी – .कता

         

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