ढूंढे मज़े बस , पढ़ने में

दर्द रख भी डाले निकाल तू अपना कागज़ पर
जमाना चलता है नुक्स निकालने की आदत पर

चीर कलेजा तू अपना सभी को पढ़वा देना
खून में रंगे शब्द देख उठेंगे हाथ वाह! की कहावत पर

ढूंढे हैं सभी ने तो मज़े हैं कि नहीं पढ़ने में
कौन किसी शायर को याद करता है शायर की शहादत पर

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.. युवराज अमित प्रताप 77
.. दर्द भरी शायरी – कता

         

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