तुम्हारे वास्ते

अगर कहते तुम्हारे वास्ते हम जान दे देते।
मगर तुम तो हमारे पीठ पर खंजर चला बैठे।।

तुम्हें अपना समझ कर आसरा घर में दिये थे हम।
मगर ओ बेरहम तुम तो हमारा घर जला बैठे।।

   ©अंशु कुमारी

         

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