बादे सबा

बादलों का जमघट बातें करता है उस आसमानी तन्हाई की
तस्वीर खींची है जहाँ मुझसे उसकी जुदाई की

जरा गुजरे बादे सबा मोहब्बत के आगोश से
सूरज के सीने में जल उठती है आग उसने जो बेवफाई की

युवराज अमित प्रताप 77
Reg.Co.Ryt.- 371/97

         

Share: