हर लम्हा अश्क लिए आता है

जिंदगी से जाकर तो कोई इतना तंग नहीं करता
कोई ऐसा पल नहीं जो दिल ख्यालों से जंग नहीं करता

करें क्या जो हर लम्हा अश्क लिए चीरता चला आता है
लहू से होती हैं आँखे लाल, कोई रंग नहीं करता

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… युवराज अमित प्रताप 77
..  दर्द भरी शायरी – .कता

         

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