इन्तजार

मालूम नही शायद इन्तजार का गम है।
मालूम नहीं शायद इन्तजार से हम हैं।
मालूम नहीं शायद ये इश्क क्या बला है।
मुझमें दिखो तुम, तुममें दिखें हम हैं।
ड़ाॅ मीनू पाण्डेय

         

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