तराश कर अक़्स निग़ाह से

कुछ यूँ ताक़ीद किया मुझको ,
कनीज़ से हूर किया मुझको ,
तराश कर अक़्स निगाहों से,
काँच कोहेनूर किया मुझको ,
… विवेक दुबे”निश्चल”@..

         

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