तुम बिन

एहसासों के यह जो धागे है न
जुदा होकर भी हमको बाँधे है न

अनंत सी दूरियाँ है हमारे दरमियाँ
चाहतें ही तो है जो हमको साधें है न

सच तो यह भी है कि मुक़म्मल जहां में
तुम बिन हम, हम बिन तुम आधे है न….

         

Share: