मुकाम

सदियों के बाद क्यों ऐसा ये मुकाम आया।
क्यों जिन्दगी की बस्ती में कोहराम आया।
बर्बाद हो गए हम तेरी मोहब्बत में।
तब सुकून आया जब तेरा सलाम आया।
ड़ाॅ मीनू पाण्डेय

         

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