क्यूं नहीं होता

वो लड़ता झगड़ता है दिन रात मुझसे
फिर बिना उस,गुज़ारा क्यूं नहीं होता।

सुन माँ बाप ने ‌जिसको पाला जतन से
फिर बता वो बेटा सहारा क्यूँ नहीं होता।

ऐसी क्या खलिस बढ़ गई संगदिली की
फिर ज़ख्म-ए-दिल पुराना क्यूँ नहीं होता।

सितारा -ए-किस्मत डूबाया क्यूँ खुदाया
फिर आफताब-ए-उजियारा क्यूँ नहीं होता।

था जी जान से नीलम,पलकों पे बिठाया
फिर न जाने वो,हमारा क्यूँ नहीं होता।

नीलम शर्मा ✍️

         

Share: