तबीली ( परिवर्तन)

नज़्म

———- तब्दीली ( परिवर्तन ) ——–

पहले के और आज अखबारों में ये तब्दीली है
पहले अपराधी को बस
अपराधी लिक्खा जाता था
नाम के साथ अब अपराधी का
मज़हब लिक्खा जाता है ।

पहले में और आज में अपने अंदर भी तब्दीली है
पहले हम तुम इक दूजे के
दुख में शामिल रहते थे
तब्दीली के दौर में अपना नेचर भी तब्दील हुआ
खबरें पढ़ कर
खबरें सुनकर
दोनों जानिब सोच है ये
अपने मज़हब का अपराधी है तो कोई बात नहीं
देख के अब मज़लूम का मज़हब
अश्क बहाए जाते हैं ।

———– राज़िक़ अंसारी ———–

         

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