फूल खिलते हैं तो आलम भी महक उठता है

 

फूल खिलते हैं तो आलम भी महक उठता है
तेरे आने से सनम गम -ए -दिल भी चहक उठता है

हम अगर चाहें भी तो नहीं रुकता
दिल ये मरजाना, डूब कर आँखों के
तेरे मयखाने में ,बेजबां दिल ये सनम बहक उठता है

करदे नजरअंदाज मेरे दिल की तू ये गुस्ताखी
तेरी चाहत की पूर्वाई पर ये खुद ही लहक उठता है

माना कि मौसम है रूठने मनाने का
न आ जाए दर्मिया कोई दीवार
सोचकर ही ये मेरा दिल दहक उठता है

नीलम शर्मा✍️

         

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