ले गया

कुछ ऐसी कशिश थी उस अंजान में
वो नीलम जिगर से सद़ा ले गया।

सुन,गया तो गया पर न दिल से मेरे
वो क़ातिल होकर भी दुआ ले गया।

वो देकर पहचानी सी ख़ामोशयाँ
सुन, यादें मेरी ख़ुश-नुमा ले गया।

वफ़ाई के बदले में वो देकर द़गा
वो हसीं बाद-ए-सबा(सवेरे की हवा) ले गया।

चुराकर ज़िंदगी से वो मेरी शबाब
नीलम नाज़नीन की हया ले गया।

नीलम शर्मा ✍️

         

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