खुद को सामने देख मैँ भी हैरान था

इतने वक्त बाद
………… खुद को सामने देख मैँ भी हैरान था
एक मुद्दत बाद अपने दिल से
……………………………. बाहर आया था मैं

जिंदगी से लदी सांसे
….. आँसू भी पसीनों से तर-ब-तर
……..बदहवास डरे से एहसास
………सहमे दिल में छिपती
…………….. कंपकंपाती धड़कन लिए
………. अमित तक को वहीं छोड़ आया था मैं

मोहब्बत में बड़ी बेरहमी से
…………… रूह तक लुटा के अपनी
सजा खुश दिखता हूँ आज मैं जिन कपड़ों में
खो कर वजूद ही अपना
बस इन्हीं में अपनी राख लिए चला आया था मैं
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युवराज अमित प्रताप 77
.. दर्द भरी शायरी – नज़्म

         

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