गोपाल दास नीरज की याद में दिल से निकली पंक्तिया

वो चले गए उनसे मैं मिल पाया नहीं
वो फिर कब आएंगे ये भी उन्होंने बताया नहीं

कहा था उन्होंने कभी ढूंढ लेना जरूर मुझे तुम
कविताएं कहती हैं कभी तुमने इतना रुलाया नहीं

मेरी कलम भी लिखते में अटक सी जाती है
उनका गीत मेरे खामोश लबों ने आज गाया नहीं

चार कदम दूर बस वो रहते थे मेरे घर से
कोसता हूँ क्यों मैं खुद से निकल पाया नहीं

रहा पश्चताप उनको अपनों से माफी न मांग पाने का
मुझे रहेगा मलाल क्यों उनका दरवाज़ा खटखटाया नहीं

युवराज अमित प्रताप 77
N.1196

गीतों के राजकुमार सरस्वती पुत्र महाकवि गोपाल दास नीरज जी को समर्पित 🙏😪
आज उनका अंतिम संस्कार 04.30 p m. पर अलीगढ़ ,नुमाइश मैदान में हुआ और सरस्वती पुत्र सरस्वती में विलीन हो गया
😪😪

         

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