जो भी दुःख याद न था वो फिर याद आया ….

जो भी दुःख याद न था वो फिर याद आया ….

हाँ बहुत खूब तेरे ख्वाबों ने हमको बहलाया
तेरी आँखों में हमे न जाने क्या नज़र आया
कि फिरसे टीस जिगर में तड़प की एेसी उठी
जो भी दुःख याद न था वो फिर याद आया

इस कदर तेरी यादों का दिल पर सरुर छाया
कि चाँद पूनम का भी मुझे मायूस नज़र आया
ताबीर-ए अश्क पर शमा को हमने खूब जलाया,
जो भी दुःख याद न था वो फिर याद आया

आज फिर से मेरे दिल में ये ख़याल आया
क्यों मेरा दिल तेरी यादों को फिर चुरा लाया
बस तेरी य़ादें हैं और संग मेरी तनहाई है
जो भी दुःख याद न था वो फिर याद आया

चाहत ने तेरी कभी गमो में डुबोकर रुलाया
तो कभी बनकर मीठी यादें हमको हँसाया
बस फकत य़ादें तेरी बाकी हैं और तेरा साया
जो भी दुःख याद न था वो फिर याद आया

नीलम शर्मा

         

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