-झूठ कहते हो-

झूठ कहते हो
कि
मेरे साथ ही रहते हो

मुझसे बेहद मोहब्बत बताते हो
है तो क्यों नहीं निभाते हो

मेरे दर्द का तुम्हे एहसास होता
तुम्हारी आँख का कोई आंसू तो रोता

मुझे तन्हा छोड़कर न जाते तुम
यादों से निकल गले भी लगाते तुम

जिंदगी मे खुशियाँ मिलती या ग़म मिलता
कभी तन्हाई की सुखी डाली पर फूल खिलता

         

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