तूं मेरी तरह दिल को रोजाना दुखाया कर

टूटे हुए ख्वाबों की तस्वीर बनाया कर

तूं मेरी तरह दिल को रोजाना दुखाया कर

बारिश का भरोसा क्या बरसे की नही बरसे

आँखों से हमेशा तु अश्को को बहाया कर

परछाइयों से अक्सर लगती है यहां ठोकर

परछाइयों से इतना रिश्ता न बढ़ाया कर…..

. मसरूफ क्यूं है इतना तूं दूसरों की खातिर

कुछ अपने लिए वक़्त से लमहों को चुराया कर

संजय ज़ख़्मी

         

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