मुझे बचा लो – बचा लो कोई

हर रोज़ है वो चिल्लाता
………………….डूब रहा हूँ मैं
………………………… मुझे बचा लो कोई
किसी से बिछड़ा अरमान हुँ
………………………. मुझे जगा लो कोई

किसी का निकला मतलब हुँ
………………. मुझे अपना लो कोई

गम के समुद्र से लिख कर हर रोज़
……….एक पुडिया वो फेंक जाता है
………पढ़ने वाला हर शख्स
……..इस अदा पर उसकी
……. वाह वाह कर ताली बजाता है

……………..एक दिन नहीं आयेगी कोई
…………………..पुडिया ना आवाज़ कोई
…….जिक्र पुड़ियों के ही होगें
………………खुद में ही डूब के
…………………………… मर जायेगा कोई

……………………….मर गया जो
………………………….वो शायर था कोई

…………बड़ा अच्छा सुनता था
…………. मुझे बचा लो… बचा लो कोई
आओ भाई अब मिल के जरा
……… कधाँ लगा लो… लगा लो कोई

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… युवराज अमित प्रताप 77
.. दर्द भरी शायरी – नज़्म

         

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