वो लौट कर आया नहीं

नज़्म

किया था जो वादा,उसने निभाया नहीं।
जिसे दिल ने कभी समझा, पराया नहीं।

भूल कर भी न आ जाए आँसू उनके,
इस तरह का कभी कदम मैंने,उठाया नहीं।

लाखों हँसी चेहरे हम पर फिदा हुए,
हमने किसी और को दिल में,बसाया नहीं।

दर्द ए गम अक्सर हम छुपाते रहे यारो,
क्या गुजरी होगी दिल पर,बताया नहीं।

हर साँस के साथ उनकी याद आ जाती,
धड़कन थी वो किसी और को,बनाया नहीं।

खुदा का दर्जा हमने उस को दिया था,
जिसने अपना असली चेहरा,दिखाया नहीं।

गैरों के साथ वो जश्न मनाते रहे रात भर,
दिल टूटा तब जश्न में मुझे,बुलाया नहीं।

दिलाशा दे कर गये हैं कि लौट कर आएँगे,
मिट गया “मुसाफिर”वो लौट कर आया नहीं।।

रोहताश वर्मा “मुसाफिर”

         

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