सांस है चलती , उम्मीद है पलती

लिए फिरता है दर्द का दरिया मुझको

जाने किस गम ए समंदर की अभी तलाश है

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रचनाकार ने अपनी रचना पोस्ट के बाद , 26/01/20 को एडिट कर खुद हटवा दी है , वह अभी इसे यहाँ पढ़ने के लिए उपलब्ध नहीं कराना चाहते , कारण-  पुस्तक में प्रकाशन

नोट – चित्र और शिर्षक नहीं हटाया गया है काग़ज़दिल पर प्रकाशन की तारीख के साथ ।

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…- Yuvraj Amit Pratap 77
.. –  दर्द भरी शायरी – नज़्म

         

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