“गुजारिश”

“बहुत सादगी से हो रहे हैं गुम…,
तुम्हारी बाते …तुम्हारे रास्ते… और तुम।।

मुझे सोचो,मुझे चाहो,
मुझे अपना बना लो …..
बस इतनी सी तुमसे……..गुजारिश थी!

उतरकर रूह में मेरी…..
आहिस्ता से ठहर जाओ …….
यही इस दिल की …… …ख्वाहिश थी !

ना देखे अब कोई तुमको,
ना चाहे अब कोई मुझको…
तुम मुझमें हो मैं तुझमें हूँ
यही बस………………साझेदारी थी!

वो लम्हा गुम गया मुझमें
वो नशा कुछ कम़ हुआ तुममें….
कहो क्या हुस्न की ही
बस मेरे ये …….राजदारी थी!

ना वो तुम… रहे मुझमें
ना ही अब मैं बची तुममें,
सिहर सा क्यूँ रहा..अब इश्क़
सुनो…… मुझमें बीमारी सी..!!””

किरण मिश्रा #स्वयंसिद्धा
23.3.2018

         

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