दर्द-ए-दिल

मुझे दश्त-ए-इश्क़-ए-तवील से,तू सराब-ओ-आब-ए-रवाँ न दे
मुझे शोख़ नज़रों से देखकर, मेरी तिश्नगी को हवा न दे
मुझे भाए ना कोई रंग – ओ – बू, मेरी जुस्तजू बस तू ही तू
मेरे पास आ मेरे हमनवाँ , मुझे फासले से सदा न दे
तेरी क़मसिनी तेरा बाँकपन , तेरी चूड़ियाँ तेरा पैराहन
ये हसीन लब ज़रा दूर रख , मेरी ख़्वाहिशों को ग़िज़ा न दे
तेरा अक़्स है मेरे रूबरू , तेरा ज़िक्र है मेरे चार सू
मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर , मुझे दर्द-ए-दिल की दवा न दे
मैं न आ सका तू गुज़र गया , यही दर्द दिल में उतर गया
मेरी आरज़ू तेरी इक झलक , मुझे तीरगी की सज़ा न दे
भरत दीप

         

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