मुझमें कतरा कतरा तू ही तो समाई है

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मेरे हर एहसास के एहसास में तू
मेरी हर बात में तू सिर्फ तू

मेरे लिखे में सभी को नज़र आऊँ मैं
मेरे लिखे में सभी को नज़र आऊँ मैं

मुझ में तो कतरा कतरा तू ही समाई है

वक्त भी तो गुजरता ज़रा ठहरा ठहरा
वक्त भी तो गुजरता ज़रा ठहरा ठहरा
छूआ हवा ने लम्हा लम्हा तू ही तो उभर आयी है

तेरी जुल्फें हीं तो बिखरी हैं फिज़ाओं में
तेरी जुल्फें हीं तो बिखरी हैं फिज़ाओं में
बादल की हर घटा में भी तू ही तो बन आई है

तू ही है जिंदगी

तू ही है जिंदगी के जिद़गी तूने ही बनाई है
बादल की हर घटा में तू ही तो बन आई है
ज्यों मूंदी पलकें भी, तू ही तो मुस्कराई है
तू ही है जिंदगी के जिद़गी तूने ही बनाई है

हवा के हर झोंके में खुद को भूलता हूँ मैं
हवा के हर झोंके में खुद को भूलता हूँ मैं
ख्याल में तू
ज़हन में तू
सांसों में भी तो तू ही उतर आई है
इस जीवन में मुझे तो बस
इस जीवन में मुझे तो बस
एक तू ही
एक तू ही तू ही तो जिंदगी नजर आयी है
एक तू ही तू ही तो जिंदगी नजर आयी है

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… युवराज अमित प्रताप 77
.. मोहब्बत भरी शायरी – नज़्म

         

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