कभी अकेले में…

कभी अकेले में वक़्त लेकर
गये दिनों का हिसाब करिए
क्या खो दिया है क्या पा लिया है
सवाल करिए जवाब करिए
जो पा गए हैं किये से ज़्यादा
तो सिर्फ़ इतना जनाब करिए
तलाशिए कोई रोता बच्चा
फिर उसकी तामीर-ए-ख्वाब करिए…..
भरत दीप

         

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