गीता पढ़ी तो कुरान को पा लिया

तुमको पा कर सब मैंने सब पा लिया
ज़मीं, आसमाँ , दो जहाँ को पा लिया

जग पूजता रहा गुमनाम फ़रिश्ते को
मैंने तुम्हें पूज कर खुदा को पा लिया

कोई सीखे मोहब्बत तो मुझसे सीखे
कि गीता पढ़ी तो कुरान को पा लिया

किसी बच्ची की इज़्ज़त बचाई तो लगा
कि अपने अंदर के इंसान को पा लिया

मिली है शोहरत उसी को इस जहाँ में
जिसने बावक्त अपने ईमान को पा लिया

सलिल सरोज

         

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