नारी जात पर अत्याचार

नज़्म

प्राचीन सभ्यता का मरण हो रहा है!
महफूज न कोई अब शरण हो रहा है!

शुरू हो गया महाभारत का दौर देखो,
हर जगह द्रौपदी चीरहरण हो रहा है!

न गाँव में, शहर में, बाहर, न घर में,
हवस में शामिल समस्त आवरण हो रहा है!

बेख़ौफ दरिंदे खुलेआम घूमते है,
मासूम बच्चीयों का अपहरण हो रहा है!

हिफाज़त के हाथ टूटे हुए हैं यहां पर,
बेसुकून नारी का भ्रमण हो रहा है!

कानून के हाथ कहाँ लम्बें है “मुसाफ़िर “,
हिफाज़त करने वाला कुंभकर्ण हो रहा है!!

रोहताश वर्मा “मुसाफ़िर “

         

Share: