मतलब की बात

चलो आज तुम्हारे मतलब की बात करते हैं
बेवजह चौक-चौराहे पर जात-पात करते हैं

दिन की शक़्ल पर एसिड डाल दिया है
अब थोड़ा खून सा लथपथ ये रात करते हैं

किसी को हिन्दू तो किसी को मुस्लिम बनाकर
सरेआम क़त्ल इंसानों के जज़्बात करते है

मज़लूम अपने हक़ की रशीद न माँग बैठे
तंत्र में पैदा ऐसे ही कुछ हालात करते हैं

किसान धूप में झुलस कर मरता है तो मेरे
हम बारिश की बिसात पर शह और मात करते है

वो बच्ची है,कब तलक बोल पाएगी
भेड़िया बनकर एक और आघात करते हैं

रुसवाई,कोफ़्त,घिन्न ने घेर रखा है हर तरफ
अगली नस्ल को हम अब यही सौगात करते हैं

सलिल सरोज

         

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