ये मौत तू जिंदगी के साथ चलती है

**ऐ मौत तू जिंदगी के साथ चलती है**
ऐ मौत तू जिंदगी के साथ चलती है
हर पल तू मिलन को तैयार रहती है

रफ़्तार जिंदगी की चाहे जितनी हो
हर कदम तू उसका साथ निभाती है

ज्यादा दूर ये सांसे जा नही सकती
जीवन की डोर तू हमेशा साधे रहती है

जरा सी नादानियां कितनी भारी होगी
हर बार मौत जीने का मौका नही देती है

दोस्त गुरुर तेरा ये यहीं रह जायेगा
मौत साथ कुछ ले जाने नही देती

ये जो लोग बड़ी बड़ी बाते करते है
बगल में खड़ी मौत , खूब हँसती है

गलत फ़हमी में रहता है तू ” नीरज ”
मौत कहाँ , किसी को पहचानती है

” नीरज सिंह “

         

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