कल तलक…

कल तलक जो खुशनुमा ख़ाब थे, अहसास थे
देखते ही देखते बेज़ार हो गये । —- राजश्री—

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दबा पलकों के चिलमन में हजारों आशिकों के दिल,
बड़ी नाजो-अदा से हम कभी इठलाया करते थे।—राजश्री—

         

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