जब तक जान बाकी है ।

1-
देखी जो नब्ज मेरी हकीम भी घबरा गया
बोला ये लाइलाज रोग तूने कैसे पा लिया !

2-
सांस बनकर रहती है तू मेरे संग,
तू है तो आज मैं जिन्दा हुं !

3
बार -बार देखती मैं घड़ी , हर पल जिंदगी आगे बड़ी
रोकती भी तो कैसे , वक़्त की थी फुलझड़ी !

4-
तुम मिलो तो एक बार, दिल का हाल जताने के लिये,
फ़िर हमें छोड़ किसी और का खयाल दिल मे नहीं आयेगा!

5-
तुम मेरे हो सब जानते हैं,
में तुम्हारी हुं कोई नहीं मानता !

6-
मैं आज भी वेसी ही हुं, जेसी उसकी पसंद है,
लेकिन अब वो वेसा नहीं, जेसा मुझे पसंद है !

7-
मेरे काधे पर सर रखकर , दर्द ए जिन्द्गी मत सुनाया करो
नूतन’ बिछडोगे यदि तो बिखर जाओगे !

8-
मुझसे मिलकर मेरे जेसि हो चली है
जिन्द्गी आज मेरे दिल जेसी हो गयी है !

9-
जरा सा कहने में क्या हो जायेगा, मुस्कुरा के ना सही
बे-मन से ही कभी तो कह दो, तुम मेरे हो !

10-
सुकून की तलाश में कलम उठाई थी
सुकून अब दिलो-दिमाग की जंग में गुमराह है !

11-
तुम मेरे साथ युं ही रहना वर्ना
मैं मेरे साथ नहीं रह पाउंगीं !

12-
जिस घर का दरवाजा नहीं होता,
मोहब्बत वो घर है !

13-
कुछ देर आराम लूँ तो , दो घंटे बड़ जाती घडी
खुलकर जीने के लिए , खुद से कइयों बार लड़ी !

14-
बेटे के लिए बीबी की ढूडाई, आम बात है
बहु आयी घर से माँ की विदाई, आम बात है !

15-
आश्चर्य होता है कभी कभी, उलझन मै रहती रोज़ ही
जीवन का हिस्सा हैं जो, कोरे कागज पर लिखना है !

16
खुद से मोहब्बत खुद से बगावत कर दी
जबसे तू मेरा हमनवां हो गया ।

17
जिस्म के लुटेरे बैठे हैं सभी यहां
जैसे औरत नहीं कोई नशा हो गया ।

18
बेजुबां जज़्बातों को क्या समझोगे तुम …
जब मेरी खामोशी को ही नहीं समझ सके ।

19
मेरे दुश्मन भी कभी मुझे भूल नहीं पायेंगे…
इतनी शिद्दत से हम उनके जहन में उतरेगे !

20
– रिश्ता बनाया है तो संजो कर रखिये
टूटकर बिखरा तो दास्तां हो गया ।

—- जयति जैन “नूतन” —-

         

Share: