इंसान तेरी फितरत ही बहुत है

मौसम ने मिज़ाज बदलना कुछ बंद सा कर दिया
पूछा तो कह दिया इंसान तेरी फितरत ही बहुत है

– कवि योगेंद्र तिवारी

         

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