“असर है”…

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ख़ामोश है माहौल , आपसी रंज़िश का असर है ।
दीवाना है कोई , बेहिसाब क़शिश का असर है ।
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विचारों का तालमेल जीने के वास्ते ज़रूरी ,
मौत आसां हुई आजकल , ये बंदिश का असर है ।
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कठोर-दिल भी अब मुस्कुराहट लिए इधर फिर रहा ,
दिल पिघल ही गया , लगातार गुज़ारिश का असर है ।
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ग़ैर-कानूनी घटनाएँ भी हैं आजकल गुमसुम ,
शाँत-ख़ूबसूरत ये फ़िज़ा दबिश का असर है ।
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रात में सुकून की नींद लेना क्या गजब लग रहा ,
ये बदलाव तो बस मेहनत के तपिश का असर है ।
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इस बार फिर एहसास इन आँखों से निकल आया ,
लगता है लगातार हो रही बारिश का असर है ।
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कौन क्या कहता है , इस उलझन में मत पड़ो “कृष्णा”,
कुछ नहीं , ये बस अपने-अपने ख़्वाहिश का असर है ।
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— °•K.S. PATEL•°
( 28/11/2018 )

         

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