आईना

गज़ल आईना
मेरा दिल याद में बहुत घबराया है
नज़र सामने आया जो आईना है|

बने सभी अरमान है जान के दुश्मन
माँग लगा सिंधुर भी मीत माईना है |

कोई छेड राग पल खबर देगा सोच
ग़ौर से तू भुला देखा कव गहना है |

ख़्वाब का रिश्ता हक़ीक़त बना जोड़ा
जख्म देकर यही सोचे समझाना है |

मेरी आँखों में यही सपना पला है
रेखा प्रतीक्षा लगी जग बेगाना है |
स्वरचित रेखा मोहन १७ /६/१८

         

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