आजकल देखकर… मुस्कुराने लगे

आजकल देखकर… मुस्कुराने लगे।
शायरी मे अजी़ …तुम हो आने लगे।१

हुश्न है जो तेरा ……जिन्दगी सा लगै,
और खुश्बू है’ बन तुम हो’ छाने लगे।२

धड़कनों,मे सदा,नाम है’ रहता तेरा,
सांस का ये चलन ..अब बताने लगे।३

मयकशी तन-बदन मे है छाया मे’रे,
होश भी,तुम मे’रा , अब चुराने लगे ।४

तुम हो’अरमा मे’री जिन्दगी के सनम,
हर तरफ तू नज़र अब है’ आने लगे।५

योगेन्द्र कुमार निषाद
घरघोड़ा,छ०ग०

         

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