आराम की सोचोगे न कभी वक़्त मिलेगा

काली घटा फिर अब आसमां में छा जाये
नहा जाय ..धरती ऐसी बारिश आ जाये

हो जाते अजनबियों में भी राब्ते कभी
जाने कौन किसको किस कदर भा जाये

वादे सैकड़ों ही कई बार उसने कर डाले
मुमकिन है इस बार कुछ तो निभा जाये

जरूर इस बार दिखा दें आईना उसको
सूरत जो देखे ख़ुद की शायद लजा जाये

आराम की सोचोगे न कभी वक़्त मिलेगा
बुलावा किस घड़ी उसका जाने आ जाये

सीधी सपाट राहें राकेष अब भाती नहीं
फूल न सही कोई कांटे ही बिछा जाये

         

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