इश्क़ में कोई चूर है तो है |

++ग़ज़ल++(2122 1212 22 )
इश्क़ में कोई चूर है तो है |
प्यार करना क़ुसूर है तो है |
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क्यों अना से करूं मैं समझौता
आज ख़ुद पर ग़ुरूर है तो है |
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जब पिलाई है मय को आँखों से
अब चढ़ा गर सुरूर है तो है |
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पास आने की कोशिशें कर ली
जान कर कोई दूर है तो है |
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मुश्किलों ने सताया लाख मुझे
फिर भी चेहरे पे नूर है तो है |
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अपनी आदत बदल नहीं सकता
यार गर बेशऊर है तो है |
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रोज मुझको सता के ख़्वाब में भी
वो सनम बे-क़ुसूर है तो है |
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मस्त रहता हैं अपनी धुन में ‘तुरंत’
गर फ़क़ीरी फ़ितूर है तो है |
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत’ बीकानेरी |

         

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