ओहद:बरा कोई

ख़ाब हमको .दिख़ा गया कोई।
कर गया जिन्दगी ….अता कोई।१

मुफलिसों के नगर मे अपना भी,
है नही ……..ओहद:बरा कोई।२

मैं कहीं का रहा न फिर भी तुम,
जख़्म दै जाओ फिर नया कोई।३

मुस्किलों से निकल कहा जाए ,
दर्द अपना कहे ….अज़ा कोई।४

राह तो है मगर ……..कहा जाऊँ,
मुझको गुमराह कर दिया कोई।५

सामने… बैठ …देख ….’योगेन्द्र”
दिल हमारा ..जला दिया कोई।

अता=दान
अज़ा=उससे
ओहद:बरा=जिम्मेदार

योगेन्द्र कुमार निषाद
घरघोड़ा,छ०ग०

         

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