कपकपाते होंठों पे दुआओं की तरह रख लेना

तुम मुझे निगाहों में ख़्वाबों की तरह रख लेना
कपकपाते होंठों पे दुआओं की तरह रख लेना

इश्क़ के ज़ख़्म सालते है बहुत देर तलक़
अपने ज़ख्मों पे मुझे दवाओं की तरह रख लेना

नए रिश्तों में पुराने धागे काम आते हैं
तुम मुझे पुरानी सदाओं की तरह रख लेना

बाज़ार में मिलते नहीं बेक़ीमत कुछ भी
अपनी नमाज़ में मुझे खुदाओं की तरह रख लेना

तेरे पास रहने की ये वजह भी सही
नेकी न सही तो गुनाहों की तरह रख लेना

सलिल सरोज

         

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