ख्वाबो में आये, वो बदल रहे हैं

कल रात ख्वाबो में आये, वो बदल रहे हैं
हम रोज़ थोड़ा थोड़ा साँचो में ढल रहे हैं।।

मोहब्बत का अफ़साना रहा यूँ ज़माने में
नफ़रत को मुहब्बत से अब छल रहे हैं।।

महसूस हुई है यूँ कमी हमे भी ज़िन्दगी में
हम रोज़ थोड़ा थोड़ा साँचो में ढल रहे हैं।।

मुश्किल बड़ी थी,यूँ अब मज़बूरी बहुत थी
साथ पाने के ख़ातिर घर से निकल रहे हैं।।

बेखबर रहे वो यूँ अब दिल के खबर से
याद में अब पत्थर दिल भी पिघल रहे हैं।।

-आकिब जावेद

         

Share: