किसको है

 

तेरे प्यार के स्पर्श से चितवन हुई उजली,
मेरी भावनाओं का आभास किसको है।

सजाकर बसंत सम मम रूप दिया नूतन,
मेरी सांसों में छन्दों सा उल्लास किसको है।

संवारा नीरस जीवन को तुमने दिव्य आभा से,
मम प्रियतम सम स्वर्णिम उजास किसको है।

मुझे प्यार है बस तुमसे, तुम्हीं ज़िन्दगी मेरी,
मेरी इस चाहत पर अटूट विश्वास किसको है।

सुंदरता जीवन की मरुभूमि में मुझको दिखलाई तूने
अब कुछ पाने खोने का डर और कयास किसको है।

आसमां हुआ नीलम जैसे ,शरमाती हुई शबनम
बता मधुमास सा सुहास उजास हुलास किसको है।

नीलम शर्मा

         

Share: