किसलिए दिन तू बुरे ज़िंदगी के याद करे

++ग़ज़ल ++(2122 1122 1122 22 /112 )
किसलिए दिन तू बुरे ज़िंदगी के याद करे
क्यों गए कल के लिए आज को बर्बाद करे
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तालिब-ए-इल्म किया करते जो ख़िदमत की तरह
क्या ज़माना है वही काम अब उस्ताद करे
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बह्र* की तह में पड़े ख़्वाब गुहर देखें यही (*समुन्दर )
कोई तो आये सदफ़* से हमें आज़ाद करे (*सीप )
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ग़म से घबरा के नहीं ज़ीस्त की चलती गाड़ी
आ के ख़ुशियों की नई कल* कोई ईज़ाद करे(*मशीन )
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बख़्श दी मांगे बिना नैमतें कितनी तुझको
फिर भी इंसान तू अल्लाह से फ़रियाद करे
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जब तलक ज़िंदा थे तरसाया जिन्हे रोटी को
याद फ़र्ज़न्द* उन्हें अब क़ज़ा के बाद करे (*पुत्र )
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भीड़ काफ़ी है मदद करने का जज़्बा भी है
सोचते हैं कि शुरू कौन अब इमदाद करे
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बन के रहमान*तो सैयाद रहेगा भूखा (*दयालु )
रहमदिल हो के भला क्या कोई जल्लाद करे
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खोख़ली आज वही करने लगा नींव ‘तुरंत ‘
काम जिसका है कि पक्की मेरी बुनियाद करे
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गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत ‘ बीकानेरी
24 /10 /2018

         

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