खून मे डूबी तलवार

ख़ून में डूबी हुई तलवार बाक़ी रह गई
सर हुआ तन से जुदा दस्तार बाक़ी रह गई

वो हवेली गिर गई रिश्तों की जो बुनियाद थी
दरमियाँ अब ख़ून की दीवार बाक़ी रह गई

हो गए तुमसे जुदा ख़ामोश कल की शब मगर
इक कसक दिल में मरे ऐ यार बाक़ी रह गई

भूल बैठे तेरा अंदाज़-ए-तकल्लुम कब का हम
हाँ मगर शीरीनी-ए-गुफ़्तार बाक़ी रह गई

मिट गया दुनिया से मेरा नाम इस का ग़म नहीं
दीद की ख़ाहिश मिरे दिलदार बाक़ी रह गई

इंतिहा तक इशक़ हालाँकि मिरा पहुंचा मगर
इब्तिदा-ए-इशक़ की तकरार बाक़ी रह गई

इक क़दम आगे ना बढ़ पाए तिरे जाने के बाद
साद लेकिन वक़्त की रफ़्तार बाक़ी रह गई

अरशद साद रूदौलवी

         

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