गरीब बाम पे छप्पर की बात करता है

==ग़ज़ल==(1212 1122 1212 22 )
गरीब बाम पे छप्पर की बात करता है
अमीर और ज़मीं जऱ की बात करता है
***
नहीं भरोसा जिसे हाथ के हुनर पे वही
लकीर और मुकद्दर की बात करता है
***
थी जिसके पास मयस्सर नहीं कभी कोड़ी
कमाल देखिये गौहर की बात करता है
****
कभी हो ज़िक्र अगर आशियाँ के जलने का
तमाम शह्र मिरे घर की बात करता है
***
हसीन एक ही काफ़ी है जुल्म की खातिर
नये क्युँ और सितमगर की बात करता है
***
नज़र के तीर से अब तक पड़े हुए जख्मी
तू किस के वास्ते खंजर की बात करता है
***
दिलों में जिस के भी तारी है ख़ौफ़ की रातें
तमाम उम्र उसी डर की बात करता है
***
बिछाता आया सदा फूल तेरी राहों में
उसी की राह में पत्थर की बात करता हैं
***
जनाब रूह का मिलना निशाँ मुहब्बत का
हबीब कौन सा पैकर की बात करता है
***
सियाह रात सी लगती है मंजिलें जिनको
मिले न राह वो रहबर की बात करता है
***
गिरधारी सिंह गहलोत ‘तुरंत’ बीकानेरी

         

Share: