झील का पत्थर

सफर से चूर बदन है सबील का पत्थर
मेरी तलाश है मेरे क़बील का पत्थर

तुम्हारे झूठ का आइना मैंने तोड़ दिया
सबूत इसका है मेरी दलील का पत्थर

सज़ा मिली है उसे आज संगसारी की
ज़माना देख रहा है ज़लील का पत्थर

गुनाहगार बरी हो गये ज़मानतें पर
गवाह बन गया है उस अदील का पत्थर

हमारी ज़ात का किरदार ज़ुल्म सहता है
कभी न टूटे सब्र -ओ-जमील का पत्थर

मेरी तलाश मुकम्मल हुई मिली मंज़िल
नज़र में आ गया ‘साद’ झील का पत्थर

अरशद साद ‘रूदौलवी

         

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