नई रिवायत

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” नई रिवायत ”

दोस्तों से कुछ शिकायत हो गई है आजकल,
हमे दुश्मनों से मोहब्बत हो गई है आजकल,

फुरसत नही है किसी को जो मेरा हाल पूछे,
अब तो उन्हें खुद से नफरत हो गई है आजकल ,

बन्दिशों के बाद भी वो याद करता है सबको ,
ये तो खयालो वाली बात हो गई है आजकल,

हर किसी की जुबान मीठे बोल है आजकल ,
ये तो मीठी छुरी वाली घात हो गई है आजकल,

मेरी परेशानियों का सिलसिला भी कम न था,
सिर्फ खबर लेने की रिवायत हो गई है आजकल,

” नीरज सिंह ”
टनकपुर(चम्पावत)
उत्तराखंड

         

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