नज़ारे बदल गये

मेरी कलम से …………….

नजरे बदली तो नज़ारे बदल गए
तारीख़े बदली तो सितारे बदल गए ।

साहिल पर तूफान ए कहर जो पड़ा
लहरे बदली तो किनारे बदल गए ।

हौसलो से परिंदो ने बनाये थे घोसले
हवाएं बदली तो सहारे बदल गए ।

आशियाना मोहब्बत का बनाया मगर
दीवारे बदली तो चौबारे बदल गए ।

मोहब्बत के शहर में आये थे हम मगर
लिबासे बदली तो चेहरे बदल गए ।

मनोजम भोपाल
9009243343

         

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